जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने हाल ही में अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया था।
इसके बाद से वे लगातार अपनी पार्टी के भीतर बगावत का सामना कर रहे हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के नाराज विधायकों के गुट ने शुक्रवार को एक बड़ी बैठक की जो कि काफी देर तक चली। उन्होंने अपनी मांगों की एक लिस्ट तैयार की है। इन विधायकों की बैठक ने उमर अब्दुल्ला की सरकार की चिंता बढ़ा दी है। सूत्रों का कहना है कि बागी विधायकों ने मुख्यमंत्री के सलाहकार और कुछ मंत्रियों को हटाने की मांग कर दी है।आपको बता दें कि शुक्रवार की शाम श्रीनगर में एनसी के 18 विधायकों ने बैठक की। इस बैठक में छह विधायक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल हुए। इन्होंने भी नाराज गुट को अपना समर्थन दिया। बागी गुट में कश्मीर घाटी और जम्मू दोनों ही जगहों के विधायक शामिल हैं। कुल मिलाकर बागी खेमे में 24 विधायक हो गए हैं।आपको बता दें कि 90 विधायकों वाली विधानसभा में नेशनल कॉन्फ्रेंस के 41 विधायक हैं। उमर अब्दुल्ला को कांग्रेस के छह विधायकों का समर्थन है। वहीं, कुछ छोटी पार्टियों और निर्दलीय विधायकों ने भी सरकार बनाने में साथ दिया है। ऐसे में अगर 24 विधायकों का बगावत शांत नहीं हुआ तो उमर अब्दुल्ला की सरकार खतरे में आ सकती है। विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव की मांग तक कर सकता है।
एक नाराज विधायक का कहना है कि वह अपनी मांगें मुख्यमंत्री तक पहुंचाने के लिए उनसे मिलना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री को उनकी बात सुननी चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह जरूर कहा कि वह पार्टी के खिलाफ नहीं हैं लेकिन कहा कि सब कुछ पहले की तरह नहीं चल सकता है। जमशेद लोन के आवास पर हुई बैठक आपको बता दें कि बागी गुट की यह बैठक विधायक कैसर जमशेद लोन के आवास पर हुई। इस बैठक में विधायकों ने एक प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं। इन्होंने मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी को हटाने और उप मुख्यमंत्री सुरेंद्र चौधरी सहित कुछ मंत्रियों को बर्खास्त करने की मांग की है। बैठक के दौरान कुछ वरिष्ठ विधायक भावुक हो गए और उन्होंने बताया कि पार्टी नेतृत्व और मुख्यमंत्री के सलाहकार ने उनके साथ कैसा बर्ताव किया था।
क्या हैं बागी विधायकों की मांगें ?
नेशन कॉन्फ्रेंस के सभी 24 बागी विधायक मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के सलाहकार नासिर असलम वानी को हटाने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा, उपमुख्यमंत्री सुरेंद्र चौधरी को हटाया जाए, जिन मंत्रियों ने अपने पद पर दो साल पूरे कर लिए हैं उन्हें हटाया जाए और मंत्रिपरिषद का पूरी तरह से पुनर्गठन किया जाए। विधायकों के साथ-साथ नेशनल कॉन्फ्रेंस के श्रीनगर से सांसद आगा रुहुल्लाह ने भी घोषणा की है कि वे अपनी संसदीय सीट और पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा दे देंगे। अब्दुल्ला के साथ रुहुल्लाह के संबंध लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं। अब उन्होंने पार्टी से अलग होकर अपना अलग रास्ता चुनने का फैसला किया है।